Saturday, 9 August 2014

देश में क्या हो नहीं सकता...

मिट्टी में मिला दे कि जुदा हो नहीं सकता,
अब इससे ज़्यादा मैं तेरा हो नहीं सकता।

दहलीज पर रख दी है किसी शख्स ने आखें,
रौशन कभी इतना तो दिया हो नहीं सकता।

पंख तो लगा ले अपने सपनो को एक बार,
इतना ऊँचा तो आसमान हो नहीं सकता।

ज़रा कदम तो बढ़ा अपनी मंज़िल की ओर,
इतना दूर तो कोई रास्ता हो नहीं सकता।

बस तू मेरी आवाज़ से आवाज़ मिला दे,
फ़िर देख कि इस देश में क्या हो नहीं सकता।